Dunagiri Mandir hindi story Darona rishi Hanuman 2nd vaisno peeth Dunagiri temple दूनागिरी मंदिर अल्मोड़ा
दूनागिरी मंदिर उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है मां वैष्णो के बाद दूसरा वैष्णों शक्ति पीठ माना जाता है, रामायण संजीवनी बूटी और महाभारत के गुरु द्रोण से भी जुड़ा है दूनागिरी मंदिर
दूनागिरी मंदिर Dunagiri Mandir
दूनागिरी मंदिर बेहद प्रसिद्ध और सुंदर मंदिर है कहते हैं यहां मन्नत मांगने पर अवश्य पूरी होती है दूनागिरी मंदिर Dunagiri mandir के लिए सड़क से अनेक सीढ़ियां शेड के साथ हैं जिनसे होकर आप मंदिर के आंगन में पहुचगे, मंदिर बेहद विशाल और आकर्षक है यहां अनेक दुकानें और लोग साल के बारह महीने आते रहते हैं और मंदिर उच्चाई पर होने की वजह से दूर – दूर के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं।
दूनागिरी मंदिर के लिए मार्ग way to Dunagiri
दूनागिरी मंदिर अल्मोड़ा जिले में स्थित है अल्मोड़ा जिले में पहुंचने के बाद नजदीकी स्थान चौखुटिया, द्वारहाट, अल्मोड़ा हैं जहां से आप आसानी से दूनागिरी मंदिर तक पहुंच सकते हो ।
द्वारहाट शहर से दूनागिरी लगभग 15 किमी. की दूरी पर स्थित है फिर सड़क से आप मंदिर के पूजा साम्रगी बाजार से खरीद सकते हैं फिर मंदिर की ओर बहुत से सीढिय़ां आपका इंतज़ार कर रही होंगी, ये सीढ़ियां लंबी पर उच्चाई में कम हैं और साथ ही इन सीढ़ियों के ऊपर से मंदिर समिति द्वारा टिन शेड बनवाए गए हैं।
देहरादून से दूनागिरी
देहरादून – ऋषिकेश – टिहरी – पौड़ी – रुद्रप्रयाग – चमोली – अल्मोड़ा
अल्मोड़ा जिले में नजदीकी शहर चौखुटिया, रानीखेत और द्वारहाट हैं।
मां दूनागिरी की कहानी Maa Dunagiri story hindi
दूनागिरी मंदिर उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है मंदिर की कहानी अलग – अलग तरह से लोगो से बताई जाती है जिसमें मंदिर को रामायण, महाभारत और साथ ही मां वैष्णो देवी से जोड़कर देखा जाता है।
कत्यूरी शासक सुधार देव ने 1318 ईसवी में मंदिर का निर्माण कर मां भगवती की मूर्ति स्थापित की, एवं मंदिर होने का प्रमाण 1181 शिलालेख से मिलता है साथ ही स्कन्द पुराण के मानस खण्ड में दूनागिरी को महामाया ब्रह्मचारी के रूप में वर्णन किया गया है।
माता दूनागिरी के इस विशेष मंदिर में हर दिन भंडारा लगता है जिसे मंदिर समिति स्वयं आयोजित करती है और यहां पर एक दानपात्र भी होता है दान देना आप पर ही निर्भर रहता है।
मां दूनागिरी की रामायण से जुड़ी कहानी Ramayana story related with Dunagiri
मां दूनागिरी मंदिर की रामायण से जुड़ी कहानी के अनुसार कहा जाता है कि भगवान लक्ष्मण के लिए जो संजीवनी बूटी लेकर हनुमान जी के जा रहे थे उसी पर्वत से एक छोटा सा टुकड़ा इस स्थान पर गिर गया जिसके बाद इसी स्थान पर मंदिर निर्माण हुआ, कहा जाता है कि इसी पर्वत पर आज भी बहुत से जड़ी – बूटियां देखने को मिलती हैं ।
दूनागिरी माता से महाभारत कथा Mahabharata relation with Dunagiri temple
दूनागिरी माता मंदिर द्रोणागिरी पर्वत पर है इस पर्वत के लिए कहा जाता है कि यह वही पर्वत है जहां पर पांडवो के गुरु द्रोणाचार्य ने तपस्या की थी।
मां दूनागिरी की मां वैष्णो से जुड़ी कथा Maa Dunagiri temple relation with Maa vaishno Devi
मां दूनागिरी की वैष्णों कथा के अनुसार मां दूनागिरी वैष्णों अवतार हैं जिस कारण इस स्थान पर ना बलि प्रथा होती है ना ही, नारियल को तोड़ा जाता है।
दूनागिरी मंदिर से जुड़े सुझाव Suggestions and information related to Dunagiri mandir
दूनागिरी मंदिर से जुड़ी अधिक से अधिक जानकारी हमारे द्वारा आपको प्रदान कि गई है यदि आप कोई सुझाव देना चाहते हैं तो आप कॉमेंट या ईमेल कर हमें जानकारी प्रदान कर सकते हैं हमें ईमेल करने के लिए क्लिक करें