Kashi Vishwanath Mandir Uttarkashi hindi ancient story bhagirath meditation lord Bhramha Lord Shiva Ganga Relation vishwanath temple hindi काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तरकाशी

काशी विश्वनाथ का यह मंदिर क्यों जुड़ा है गंगा के आगमन भगीरथ ब्रह्मा गंगा को धारण किया था शिव ने और यहीं है 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक भगवान परशुराम पुराणों में भी है नाम

उत्तरकाशी Uttarkashi

पहले उत्तरकाशी को विश्वनाथ की नगरी के नाम से जाना जाता था जिसे बाद में यानी आज के समय में उत्तरकाशी के नाम से जाना जाने लगा नाम से जानी जाती थी, उत्तरकाशी का विवरण केदार खण्ड में भी मिलता है उत्तरकाशी को वहां बाड़ाहाट के नाम से उल्लेखित किया गया है, एवं पुराणों में इसे सौम्य काशी के नाम से जाना जाता है।

काशी भारत में तीन ही हैं जिनमें से 2 उत्तराखण्ड और एक वाराणसी में है उत्तराखण्ड में गुप्तकाशी, उत्तरकाशी और एक काशी वाराणसी में है।

मार्ग काशी विश्वनाथ way to kashi vishwanath

काशी विश्वनाथ मंदिर उत्तराखण्ड तक पहुंचने के लिए आपको पहले उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में पहुंचना होगा जहां से आप आसानी विश्वनाथ मंदिर तक पहुंच सकते हैं उत्तरकाशी में मैन टैक्सी स्टैंड से थोड़ी सी ही दूरी पर यह मन्दिर स्थित है

कमलेश्वर महादेव श्रीनगर गढ़वाल

काशी विश्वनाथ, उत्तरकाशी

काशी विश्वनाथ का यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जिसकी स्थापना भगवान परशुराम ने की थी कहते हैं की यहां स्वयं विश्वनाथ ने दर्शन दिए थे ।

कहते हैं कि मंदिर की बाहरी दीवारों का निर्माण गढ़वाल नरेश प्रद्युम्न शाह ने किया जिसके बाद बाद में प्रद्युम्न शाह के बेटे सुदर्शन शाह की पत्नी महारानी कांति ने मंदिर का जीर्णोधार करवाया था।

मंदिर में त्रिशूल Trident in vishwanath temple

मंदिर में आज भी 26 फिट उच्चाई वाला त्रिशूल है यह त्रिशूल विशेष है जिसके लिए कहा जाता है कि यह पूरे शरीर के बल से हिल नहीं सकता परन्तु उंगलियों के दाब से हिल जाता है।

मंदिर में लिंग Shivling at kashi vishwanath temple

दक्षिण की ओर झुका एक लिंग है लिंग से जुड़ी मान्यता है कि बारह ज्योतर्लिंगों में से एक यहीं उत्तरकाशी में है और इस लिंग के दर्शन काशी में उपस्थित लिंग के दर्शन के समान ही माना जाता है, कहते हैं कि गंगोत्री धाम जो कि उत्तरकाशी में है के दर्शन इस लिंग के दर्शन या उत्तरकाशी के रामेश्वर मंदिर के दर्शन किए बिना अधूरे ही होते हैं अतः इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है।

एवं यहां गर्भ गृह में गणेश जी एवं पार्वती की मूर्ति हैं।

मां पार्वती से जुड़ी मान्यता Maa parvati story

काशी विश्वनाथ से जुड़ी एक और मान्यता है कि मां पार्वती ने जब महिषासुर का वध किया तो मां ने अपना त्रिशूल धरती पर फेंका था जो इसी स्थान पर आया था तभी से शक्ति स्तंभ के रूप में इस स्थान की पूजा की जाती है।

उत्तरकाशी के मंदिर से जुड़ी मान्यता story related to uttarkashi

उत्तरकाशी और मां गंगा से जुड़ी एक कथा है जिसमें कहा जाता है कि भगीरथ ने जहां ब्रम्हा की उपासना की मां गंगा को धरती पर लाने के लिए जहां तप किया वह स्थान यहीं है उत्तरकाशी, यहीं ब्रम्हा ने भगीरथ को महादेव की आराधना करने को कहा क्योंकि केवल वे ही गंगा के प्रबल वेग को धारण कर सकते थे।

महासू देवता हनोल

काशी विश्वनाथ उत्तरकाशी से जुड़ी जानकारी information related to kashi vishwanath

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