Gopinath Temple Gopeshwar chamoli gopeswar Lord shiva temple in chamoli famous temple chamoli gopinath in hindi kamdev story cow story gopinath hindi गोपीनाथ मन्दिर गोपेश्वर चमोली उत्तराखण्ड मन्दिर हिंदी जानकरी कथा इतिहास

Gopinath Gopeshwar Hindi कामदेव को यहीं भगवान शिव ने क्रोध में आकर किया था भस्म, ताड़कासुर के अंत की कथा गोपेश्वर से जुडी हुई गोपीनाथ मन्दिर चमोली नजदीक ही कर्णप्रयाग शहर

Gopinath Mandir chamoli hindi

Gopinath mandir Gopeshwar

गोपीनाथ मन्दिर मार्ग Gopinath temple way

उत्तराखण्ड में दो मंडल है कुमाऊ और गढ़वाल दोनों मंडलों से आपके लिए जिलेवार रास्ता नीचे दिया गया है जिससे आप आसानी से गोपीनाथ मन्दिर तक पहुच सकते हैं

चांदपुर गढ़ी

गढ़वाल मार्ग Garhwal marg to Gopinath Gopeshwar

गढ़वाल मार्ग – देहरादून – ऋषिकेश – श्रीनगर गढ़वाल (पौड़ी) – रुद्रप्रयाग – चमोली – गोपेश्वर

कुमाऊं मार्ग Kumaon marg to Gopinath Mandir

कुमाऊं मार्ग – अल्मोड़ा – चमोली – गोपेश्वर

पंचकेदारों में से एक चतुर्थ केदार भगवान शिव के केदार रुद्रनाथ को शीतकाल यानी शर्दियों के समय यहीं गोपेश्वर में गोपीनाथ मन्दिर में पूजा अर्चना दर्शन किये जाते हैं, मन्दिर नगर में स्थित है जिस कारण यहाँ लगातार श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है

गोपीनाथ मन्दिर चमोली मन्दिर से जुडी जानकारी

गोपीनाथ मन्दिर के बारे में कहा जाता है की मन्दिर का निर्माण लगभग 9वीं शताब्दी में कत्युरी शासको ने करवाया मन्दिर नागर शैली में निर्मित है एवं मन्दिर में कत्युरी और नेपाली राजा अनेक मल से सम्बन्धित अभिलेख हैं जिनमे से कुछ अभिलेखों को पढ़ा जाना शेष है, मन्दिर के नजदीक ही माँ दुर्गा, गणेश और हनुमान जी की मूर्तियाँ भी हैं|

रावण की तपोस्थली भी है नजदीक रावण ने की थी यहीं तपश्या

मन्दिर में विशेष रूप से एक त्रिशूल है जो हर किसी का आकर्षण अपनी ओर करता है यह बिना जंग का और अष्टधातु से निर्मित त्रिशूल है कहते हैं इस त्रिशूल पर कभी भी जंग नही लगता और इसे छूने पर कम्पन्न होने लगता है और कुछ लोग कहते हैं की यह त्रिशूल पुरे शरीर के जोर से नही हिलता परन्तु हाथ की सबसे छोटी ऊँगली से हिलता है |

गोपीनाथ मन्दिर गोपेश्वर कथा Gopinath Temple Gopeshwar story in hindi

गोपीनाथ मन्दिर चमोली से जुडी दो कहानियां हैं जिनमे से एक नीचे हैं

गोपीनाथ मन्दिर भगवान शिव से जुड़ा है कहते हैं इसी स्थान पर भगवान शिव ने तप किया था और ताड़कासुर के आतंकित करने पर, भगवान शिव को कामदेव द्वारा अपने कामयुक्त बाणों का इस्तेमाल कर शिव का ध्यान भंग किया गया था जिस कारण भगवान शिव ने कामदेव को वहीं भस्म कर दिया था, और ताड़कासुर को वरदान था की उसका वध केवल महादेव से उत्पन्न पुत्र से ही हो सकता है परन्तु माँ सती ने यज्ञ में आहुति दे दि जिस कारण ताड़कासुर अत्यधिक उपद्रवी हो गया था |

और दूसरी कथा Gopinath mandir अनुसार पुराने समय में राजा सागर का इस स्थान अधिपत्य था परन्तु यहाँ एक अजीब घटना घटित हुयी जिसके अनुसार गायों का दूध चढाई पर जाने पर अपने आप निकल कर शिवलिंग की ओर जाता था जिस कारण बाद में राजा द्वारा इस स्थान पर मन्दिर का निर्माण करवाया गया |

गोपीनाथ मन्दिर गोपेश्वर से जुडी जानकरी

हमारे द्वारा आपके लिए Gopinath mandir, gopeshwar से सम्बन्धी अधिक से अधिक जानकारी प्रदान की गई है यदि आप किसी प्रकार का सुझाव या जानकारी देना चाहते हैं तो आप कॉमेंट या ईमेल के जरिए हमसे सम्पर्क कर सकते हैं

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रावण का यज्ञ कुंड जहां करी थी शिव आराधना

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