शिव पार्वती की शादी विष्णु बने भाई तो ब्रह्मा बने पुरोहित तीन युगों से आज भी जल रही है ज्योति त्रियुगी नारायण मंदिर Hindi Triyugi naren temple, Rudraprayag Shiv Parvati marriage temple trijugi narayan mandir rudraprayag hindi uttarakhand triyugi naren mandir

त्रियुगी नारायण जहां तीन युगों से जलती है यज्ञ की जोत, जहां हुआ था शिव पार्वती का विवाह आज भी दम्पत्ति पुत्र प्राप्ति, सुखी वैवाहिक जीवन के लिए आते हैं दूर – दूर से, स्थानीय गीतकार श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी के गीत “हिमवंत देश” होला ने भी इस स्थान का सुन्दर व्याख्यान किया गया है

त्रियुगी नारायण तक मार्ग Way to Triyugi narayan temple

त्रियुगी नारायण मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है जिसके लिए सड़क मार्ग से पहुंचने के लिए आपको पहले रुद्रप्रयाग जिले में पहुंचना होगा, रुद्रप्रयाग तक पहुंचने के लिए आपको जिलेवार रास्ता तय करना होगा जिसकी जानकारी नीचे दी गई है

देहरादून से रुद्रप्रयाग

देहरादून – ऋषिकेश – पौड़ी – रुद्रप्रयाग

कुमाऊं से रुद्रप्रयाग

कुमाऊं – अल्मोड़ा – चमोली – रुद्रप्रयाग
रुद्रप्रयाग तक पहुंचने के बाद त्रियुगी नारायण मंदिर ज्यादा दूर नहीं है बस आपको रुद्रप्रयाग से सोनप्रयाग तक 12 किमी. की दूरी तय करनी होगी यह दूरी आप चाहे तो निजी गाड़ी या अन्य किसी वाहन की सहायता से आसानी से पूरी कर सकते हैं।

 

कार्तिक स्वामी

 

त्रियुगी नारायण Triyugi Narayan

त्रियुगी नारायण उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित वह मंदिर है जहां शिव – पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था, त्रियुगी नारायण मंदिर त्रियुगी नारायण गांव में स्थित है ।
त्रियुगी नारायण मंदिर
Thanks to Kheem singh ji

त्रियुगी नारायण नाम का अर्थ Triyugi Narayan meaning

त्रियुगी नारायण शब्द तीन शब्दों से मिलकर बना है त्री+युगी+ नारायण जिनके शब्दों के क्रमिक अर्थ त्री यानी तीन, युग यानी काल, एवं नारायण यानी भगवान विष्णु ।
कुछ लोगों का मानना है कि इस शब्द का पूरा अर्थ है जहां तीन युगों से ज्योति जल रही है और यह मंदिर नारायण को समर्पित है इसलिए इस मंदिर को त्रियुगी नारायण के नाम से जाना जाता है।

त्रियुगी नारायण मंदिर से जुड़ी कथा Triyugi Narayan temple story

त्रियुगी नारायण मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि यह वही मन्दिर है जहां शिव – पार्वती की शादी हुई थी एवं इस विवाह से जुड़ी एक कहानी है
कहा जाता है कि पार्वती ने भगवान शिव के लिए कठोर तप किया जिसके बाद बाद में शिव ने भी विवाह के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था और फिर इसी स्थान पर भगवान शिव – पार्वती की शादी इसी स्थान पर हुई थी ।
मंदिर के सामने ही ब्रह्म शीला है माना जाता है कि यहीं पर विवाह का वास्तविक स्थल माना जाता है एवं यहां दर्शन के लिए आए लोग अक्सर यहां से यज्ञ की भूती को अपने साथ ले जाते हैं कहते हैं कि इससे सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।

 

यहां पूछे गए थे यक्ष द्वारा प्रश्न पांडवो से

 

त्रियुगी नारायण मंदिर से जुड़ी विशेष जानकारी triyugi narayan temple information

त्रियुगी नारायण मंदिर, रुद्रप्रयाग में आज भी यज्ञ की ज्वाला जल रही है जिसके लिए कहा जाता है कि यह ज्वाला तबसे जल रही है जबसे शिव – पार्वती का विवाह हुआ था और आज भी लोग यहां सुखी वैवाहिक जीवन के लिए लकड़ियां लेकर जाते हैं और माना जाता है कि यहां विवाह की प्रक्रिया संपन्न होने पर सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।
कहा जाता है कि इसी मंदिर में भगवान विष्णु, मां सरस्वती देवी व भू- देवी के साथ आज भी विद्यमान हैं एवं यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है।

त्रियुगी नारायण मंदिर में कुंड

त्रियुगी नारायण मंदिर में तीन कुण्ड है इन कुंडो को कहा जाता है कि इन कुण्ड में जल सरस्वती कुण्ड से आता है और सरस्वती कुण्ड भगवान विष्णु की नासिका से उत्पन्न हुआ ।
त्रियुगी मंदिर में उपस्थित तीन कुण्ड
मंदिर में इन तीन कुण्ड के बारे में कहा जाता है कि तीन कुण्ड में ही देवी देवताओं ने विवाह से पूर्व स्नान किया था ।
ब्रह्म कुण्ड : वह कुण्ड जहां ब्रह्म देव ने विवाह से पूर्व स्नान किया था।
विष्णु कुण्ड : वह कुण्ड जहां विष्णु जी ने विवाह से पूर्व स्नान किया था।
रूद्र कुण्ड : वह कुण्ड जहां सभी देवी देवताओं ने विवाह से पूर्व स्नान किया था।
एवं सरस्वती कुण्ड : वह कुण्ड जहां से सभी कुंडों के लिए पानी की पूर्ति होती है ।
त्रिजुगी नारायण मंदिर
thanks to kheem singh ji

 

इस जगह पर आज भी मिलते हैं कंकाल

 

त्रियुगी नारायण जानकारी

हमारे द्वारा आपके लिए त्रियुगी नारायण सम्बन्धी अधिक से अधिक जानकारी प्रदान की गई है यदि आप किसी प्रकार का सुझाव या जानकारी देना चाहते हैं तो आप कॉमेंट या ईमेल के जरिए हमसे सम्पर्क कर सकते हैं (ईमेल करने के लिए क्लिक करें)

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