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उत्तराखण्ड राज्य निर्माण 9 नवम्बर 2000 उत्तराँचल नामकरण राज्य पुर्नगठन के कारण उद्देश्य एवं सुविधाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार उत्तरखण्ड में Uttarakhand state restruture brief view uttrakhand hindi

उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के उद्देश्य, उत्तराखण्ड राज्य की मांग उत्तरांचल से उत्तराखण्ड नामकरण राजनितिक उथल पुथल और उत्तराखण्ड में आपदाओं का प्रकोप देवभूमि उत्तराखण्ड

उत्तराखंड की मांग को लेकर कई वर्षों तक चले आंदोलन के बाद आखिरकार 9 नवंबर 2000 को उत्तराखण्ड का 27वें राज्य के रूप में भारत गणराज्य में शामिल किया गया था,  वर्ष 2000 से 2006 तक इसे उत्तरांचल के नाम से पुकारा जाता था, लेकिन जनवरी 2007 में स्थानीय लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इसका आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया |
उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के उद्देश्य

उत्तराखण्ड राज्य का अर्थ meanin of uttarakhand state

उत्तराखण्ड संस्कृत बोली से लिया गया है जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘उत्तरी शहर’. इसका गठन उत्तर प्रदेश की तत्कालीन सरकार द्वारा उत्तराखंड क्रांति दल के लंबे संघर्ष के बाद किया गया था, जिसने पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया और अलग राज्य की मांग की थी |

Uttarakhand District Names

Garhwal Division Dehradun गढ़वाल मण्डल के जिले

  • Haridwar
  • Chamoli
  • Rudraprayag
  • Tehri Garhwal
  • Uttarkashi
  • Pauri Garhwal
Kumaoun Division कुमाऊ मण्डल के जिले
  •  Almora
  • Nainital
  • Pithoragarh
  • U S Nagar
  • Bageshwar
  • Champawat

उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्रियों की सूची uttarakhand chief minister list

Sl. No.

Chief Ministers of Uttarakhand

From

To

Party

1

Nityanand Swami

Nov 9, 2000

Oct 29, 2001

BJP

2

Bhagat Singh Koshiyari

Oct 30, 2001

Mar 1, 2002

BJP

3

N. D. Tiwari

Mar 2, 2002

Mar 7, 2007

INC

4

B. C. Khanduri

Mar 8, 2007

Jun 23, 2009

BJP

5

Ramesh Pokhriyal Nishank

Jun 24, 2009

Sep 10, 2011

BJP

6

B. C. Khanduri

Sep 11, 2011

Mar 13, 2012

BJP

7

Vijay Bahuguna

Mar 13, 2012

Jan 31, 2014

INC

8

Harish Rawat

Feb 1, 2014

March 27, 2016

INC

(President’s rule)

March 27, 2016

April 21, 2016

N/A

9

Harish Rawat

April 21, 2016

April 22, 2016

INC

(President’s rule)

April 22, 2016

May 11, 2016

N/A

10

Harish Rawat

May 11, 2016

Mar 18, 2017

INC

11

Trivendra Singh Rawat

Mar 18, 2017

Mar 10, 2021

BJP

12

Tirath Singh Rawat

Mar 10, 2021

July 04, 2021

BJP

13

Pushkar Singh Dhami

July 04, 2021

Incumbent

BJP

उत्तराखण्ड में राज्य पुनर्गठन से लेकर अब तक मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन, रोजगार, सड़क, पानी, और बिजली (ऊर्जा) के मुद्दे मुख्य रूप से रहे हैं जिनपर पुर्नगठन से आजतक कार्य हुआ है परंतु ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जो इन्ही मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं |

उत्तराखण्ड हरेला पर्व

उत्तराखण्ड के राज्यपालों की सूची

Sl.No

Governor

From

to

1

Baby Rani Maurya

August 26, 2018

Incumbent

2

Krishan Kant Paul

January 8, 2015

25 August 2018

3

Aziz Qureshi

May 15, 2012

7 January 2015

4

Margaret Alva

August 6, 2009

14 May 2012

5

Banwari Lal Joshi

October 29, 2007

5 August 2009

6

Sudarshan Agarwal

January 8, 2003

28 October 2007

7

Surjit Singh Barnala

November 9, 2000

7 January 2003

 

उत्तराखण्ड राज्य की राज्य आन्दोलन की घटनाएँ

उत्तराखण्ड में आन्दोलन राज्य पुनर्गठन  हेतु अनेक आन्दोलन राज्य के लोगो द्वारा चलाया गये जिससे की प्रदेश में विकास की लहर उठाई जा सके जिसमे से कुछ आन्दोलन नीचे दिए गए हैं –
  • खटीमा गोलीकाण्ड 1 सितंबर, 1994 (काला दिन)
  • मसूरी गोलीकाण्ड  2 सितंबर 1994
  • मुजफ्फरनगर गोलीकाण्ड / रामपुर तिराहा काण्ड 2 अक्टूबर, 1994
  • देहरादून गोलीकाण्ड 3 अक्टूबर, 1994
  • कोटद्वार काण्ड 3 अक्टूबर, 1994
  • श्रीयंत्र टापू (श्रीनगर) काण्ड ने 7 नवंबर, 1994

उत्तराखण्ड राज्य निर्माण में संवेधानिक प्रक्रिया

उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की मांग लम्बे समय से चली आ रही थी जिसके लिए अनेक आन्दोलन हुए जिसके बाद15 अगस्त 1996 को तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा ने लाल किले से नए उत्तराखंड राज्य के निर्माण की घोषणा की थी जिसके बाद 27 जुलाई 2000 को उत्तर प्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2000 के नाम से लोकसभा में प्रस्तुत हुआ। ऊधम सिंह नगर को 29 जुलाई 2000 को जार्ज कमेटी की सिफारिश के बाद उत्तराखंड में मिलाया।

  • 1 अगस्त 2000 को लोकसभा में पारित
  • 10 अगस्त 2000 को राज्यसभा में पारित
  • 28 अगस्त 2000 को राष्ट्रपति के० आर० नारायण द्वारा नये राज्य की घोषणा की गयी थी और उत्तरांचल नाम का नया राज्य अस्तित्व में आया |

9 नवम्बर 2000 को 27 वें राज्य के रूप में उत्तरांचल का गठन हुआ। देहरादून को इसकी अस्थायी राजधानी घोषित किया, इसके अंतरिम मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी को बनाया, 1 जनवरी 2007 को इसका नाम उत्तराखंड हो गया परन्तु अब उत्तराखण्ड में दो राजधानियां हैं एक ग्रीष्मकालीन राजधानी जो की देहरादून में है जबकि एक शीतकालीन राजधानी जो की चमोली जिले के गैरसैण में तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा घोषित की गयी।

उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के उद्देश्य

उत्तराखण्ड में राज्य पुनर्गठन से लेकर अब तक मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, पलायन, रोजगार, सड़क, पानी, और बिजली (ऊर्जा) के मुद्दे मुख्य रूप से रहे हैं जिनपर पुर्नगठन से आजतक कार्य हुआ है परंतु ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जो इन्ही मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित हैं इस वजह से उत्तराखण्ड राज्य निमार्ण के उद्देश्य पूर्ण नही हो पाए हैं हांलाकि कुछ मामलों में पूर्ण होने की ओर अग्रसर जरुर हैं |

उत्तरखण्ड में  शिक्षा

उत्तरखण्ड में  शिक्षा प्राचीन काल में बदरिका श्रम, रूद्राश्रम, शुक्राश्रम, वशिष्टाश्रम, कण्वाश्रम, कपिलाश्रम, नारदाश्रम, गणेशाश्रम, गरुणाश्रम आदि शिक्षा के महान केन्द्र (Center) थे, जहाँ आश्रम पद्धति से वेद-वेदांग, दर्शन, शस्त्र, संगीत, योग, ज्योतिष आदि की शिक्षा दी जाती थी। महाकवि कालिदास एवं चक्रवर्ती सम्राट भरत (इन्हीं के नाम पर अपने देश का नाम भारत पड़ा) कण्वाश्रम से संबंधित थे। वर्तमान में भी हरिद्वार, ऋषिकेश, जोशीमठ, रानीखेत, देव प्रयाग आदि नगरों आश्रम पद्धति से शिक्षा दी जाती है।

क्र.सं.

संस्था

2014 – 2015

1

जूनियर बेसिक स्कूल

15517

2

सीनियर बेसिक स्कूल

4841

3

उच्चतर माध्यमिक/इंटरमीडिएट

3428

4

स्नातक /स्नातकोत्तर महाविद्यालय

116

5

विश्व विद्यालय

16

6

डीम्ड यूनिवर्सिटी

4

7

कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय

1

8

आई.आई.टी.

1

आधुनिक शिक्षा का निर्माण 19वीं शताब्दी में अग्रेजी शासनकाल में शुरू हुआ जिसके बाद रामनगर जिला नैनीताल में उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद की स्थापना की गयी, उच्च शिक्षा का निर्देशन हल्द्वानी में स्थापित किया गया, टेकनिकल शिक्षा के लिए श्रीनगर और इसके निदेशन के लिए रूडकी में इसके निदेशालय की स्थापना की गयी|

उत्तरखण्ड में स्वास्थ्य सेवाएं
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। प्रदेश के सीमांत जिलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना और चिकित्सकों की नियुक्ति हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है जिसका कारण है प्रवर्तीय क्षेत्रो की बजाय मैदानी क्षेत्रों की ओर झुकाव|
इस समय प्रदेश में 2260 चिकित्सक तैनात हैं। पहले यह संख्या 1100 थी, चिकित्सको की कमी केवल सरकार की ही कमी की वजह से नही है बल्कि इसके लिए कुछ ऐसे  चिकित्सक भी जिम्मेदार हैं जो सरकारी योजना के जरिये कम शुल्क पर शिक्षा प्राप्त करने और डिग्री लेने के बाद कई चिकित्सक बांड की शर्तों का उल्लंघन कर निकल जाते हैं |
सरकारी स्वास्थ्य सुविधा अटल आयुष्मान योजना
सरकार ने प्रत्येक परिवार को मुफ्त उपचार सेवाओं के दायरे में लिया है। इस योजना के तहत हर परिवार को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त उपचार दिया जा रहा है। इस योजना में 45.96 लाख कार्ड बन चुके हैं। चार लाख से अधिक लोग इसका उपचार ले चुके हैं। इसके साथ ही सरकार ने राज्य कार्मिक, पेंशनरों व उनके आश्रितों के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना लागू की है। इसमें असीमित कैशलेस उपचार की सुविधा दी गई है।
जहाँ भारतीय जनता पार्टी ने अटल आयुष्मान योजना शुरू की तो वहीं कांग्रेस ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की थी 
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना चलाई गई थी। योजना के तहत राज्य के उन बीपीएल और एपीएल परिवारों को पात्र बनाया गया था, जो सरकारी कर्मचारी, पेंशनर, उनके आश्रित और आयकरदाता की श्रेणी में नहीं आते थे। 12 लाख व्यक्ति इस सुविधा के दायरे में थे। भुगतान की दिक्कतों के चलते यह योजना बंद हो गई थी।
सरकारी अस्त्पतालों में जाँच व दवाइयां
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दवाईयों के साथ पैथोलाजी जांच नि:शुल्क जबकि किडनी मरीजों के लिए हर जिले में डायलिसिस की सुविधा दी जाती है |
 

उत्तरखण्ड में स्वास्थ्य सेवाएँ  वर्ष 2017 – 2021 अनुसार

डाक्टर 1100 – 2260

आक्सीजन जनरेशन प्लांट – 01 – 87

आइसोलेशन बेड – 1200 – 27186

आइसीयू – 13 – 1655

वेंटीलेटर – 116 – 1016

आक्सीजन सिलेंडर – 1193 – 22420

आक्सीजन कंसन्ट्रेटर 275 – 9838

 

उत्तराखण्ड में रोजगार

उत्तराखंड में बेरोजगारी की समस्या एक प्रमुख मुद्दा है और उत्तराखंड में बेरोजगारी की दर बहुत ज्यादा है उच्च बेरोजगारी दर के पीछे कम निवेश, निम्न शिक्षा स्तर और उद्योगों की कमी कुछ प्रमुख कारण हैं जिसका कारण राजनेता, दुर्गम भोगोलिक परिस्थिति, हिमालयी क्षेत्र, लोगो तक सुविधाओं का अभाव परन्तु इसके कुछ अन्य कारण भी हैं जैसे उत्तराखंड में बेरोजगारी की समस्या का एक कारण यह भी है कि इसके अनुकूल जलवायु और हरे भरे वातावरण के कारण अन्य राज्यों के लोग इस क्षेत्र में आते रहे हैं। इससे नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा में वृद्धि हुई है, साथ ही इस क्षेत्र पर जनसंख्या दबाव में वृद्धि हुई है। उत्तराखंड में बेरोजगारी की समस्या का दूसरा कारण औद्योगिक विकास का अभाव और राज्य के भीतर एक छोटा औद्योगिक आधार है। एकमात्र प्रमुख औद्योगिक केंद्र उत्तराखंड के बाहर ही स्थित है, जिससे स्थानीय स्तर पर बहुत कम विकल्प और कम अवसर उपलब्ध हैं।

उत्तराखण्ड में ऊर्जा व्यवस्था

उत्तराखंड राज्य में ऊर्जा उत्पादन क्षमता की क्षमता लगभग 1,310,25 मेगावाट है, जबकि सिंचाई विभाग के एक अध्ययन के अनुसार गढ़वाल में 15,000 तथा कुमाऊँ में 5,000 मेगावाट विद्युत का उत्पादन प्रतिवर्ष किया जा सकता है। उत्तराखंड सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2001 को उत्तराखंड विद्युत निगम लिमिटेड का गठन किया गया था टीएचडीसी टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में किया गया था पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड का गठन 27 मई 2004 को हुआ, उत्तराखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलमेंट एजेंसी उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी जुलाई 2001 में विशेषकर अक्षय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने के लिये स्थापित की गई है |
 

उत्तराखण्ड में खेती

उत्तराखंड राज्य में मुख्य रूप से खेती की जाती है जहाँ अधिकतर किसान हैं यहाँ पारंपरिक रूप से और भोगोलिक रूप से विषम जलवायु है जिस कारण अधिकतर लोगो द्वारा खेती करने के बाद भी खेती से घर चलाना लोगो के लिए बेहद कठिन है |

उत्तराखण्ड खेती के रूप में तीन भागों में विभाजित है
  1. तराई, 
  2. भाभर
  3. पहाड़ी,
 जिनमें से लगभग 86 प्रतिशत क्षेत्र पहाड़ों से घिरा हुआ है पर्वतीय क्षेत्रों में 60-70 प्रतिशत भोजन का उत्पादन यहां के छोटे किसानों द्वारा किया जाता है, जो पारंपरिक खेती का पालन करते हैं
जिसमें मुख्य फसलें हैं जैसे मोटे अनाज (रागी, झुंगरा, कौणी, चीणा आदि), धान, गेहूं, जौ, दालें (गहत, भट्ट, मसूर, लोबिया, राजमाश आदि), तिलहन, कम उपयोग वाली फसलें (चैलाई, कुट्टू, ओगल, बथुआ, कद्दू, भंगीरा, जखिया आदि)।

उत्तराखण्ड में जैविक खेती क्षे०

        वर्ष – क्षेत्रफल हेक्टेयर में            

 

  • 2017-18  –   35106
  • 2018-19  –  124365
  • 2019-20  –  154226
  • 2020-21  –   220540

उत्तराखंड में हुई प्रमुख आपदाएं

उत्तराखण्ड में आपदाओं का भी एक इतिहास रहा है यहाँ समय – समय पर प्राकृतिक और मानवनिर्मित  आपदाओं ने कहर बरपाया है आपदा का अर्थ किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक या मानव निर्मित कारणों से होने वाली दुर्घटना, घटना, आपदा या गंभीर घटना, या दुर्घटना या लापरवाही से है जिसके परिणामस्वरूप जीवन का पर्याप्त नुकसान होता है 

आपदा के प्रकार

  1. प्राकृतिक आपदा
  2. मानव निर्मित आपदा
प्राकृतिक आपदा :- पर्यावरण असंतुलन और धरती की आंतरिक हलचल जब अपने भयानक रूप में प्रकट होती है तब हम इसे प्राकृतिक आपदा कहते हैं | बाढ़, सूखा, भूकंप, ज्वालामुखी तथा तूफान आदि प्राकृतिक आपदाएँ कहलाती हैं

मानव निर्मित आपदा
मानवीय कार्य से निर्मित आपदा लापरवाही, भूल, या व्यवस्था की असफलता मानव – निर्मित आपदा कही जाती है।

उदहारण – आग, दुर्घटनाएँ (सड़क, रेल या वायु) औद्योगिक दुर्घटनाएँ या महामारी 
 

उत्तराखण्ड में कुछ आपदायें

  1. 23 जुन, 1980 – उत्तरकाशी के ज्ञानसू में भूस्खलन से तबाही।
  2. 1991- 1992 – चमोली के पिंडर घाटी में भूस्खलन।
  3. 11 अगस्त, 1998 – रुद्रप्रयाग के उखीमठ में में भूस्खलन।
  4. 17 अगस्त, 1998 – पिथौरागढ़ के मालपा में भूस्खलन में लगभग 350 लोगों की मृत्यु।
  5. 10 अगस्त, 2002 – टिहरी के बुढाकेदार में भूस्खलन।
  6. 2 अगस्त, 2004 – टिहरी बाँध में टनल धसने से 29 लोगों की मृत्यु।
  7. 7 अगस्त, 2009 – पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में अतिवृष्टि।
  8. 17 अगस्त, 2010 – बागेश्वर के कपकोट में सरस्वती शिशु मंदिर भूस्खलन की चपेट में 18 बच्चों की मृत्यु।
  9. 16 जून, 2013 – केदारनाथ में अलकनंदा नदी में आपदा से हजारों लोगो की मृत्यु।
  10. 16 जून, 2013 – पिथौरागढ़ के धारचूला धौलीगंगा व काली नदी में आपदा।
  11. वर्ष 2013 – की केदारनाथ आपदा

कोरोना महामारी

विषाणु (virus) अकोशकीय अतिसूक्ष्म जीव हैं जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ये नाभिकीय अम्ल और प्रोटीन से मिलकर गठित होते हैं, शरीर के बाहर तो ये मृत-समान होते हैं परंतु शरीर के अंदर जीवित हो जाते हैं। इन्हे क्रिस्टल के रूप में इकट्ठा किया जा सकता है।
इसी कारण इन्हें सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी कहा जाता है क्योंकि ये जीवित और मृत दोनो अवस्थाओं में पाए जाते हैं।

कोरोना के आम लक्षण:

W.H.O. के अनुसार कोरोना के लक्ष्ण
  1. बुख़ार
  2. खांसी
  3. थकान
  4. स्वाद और गंध न पता चलना
कम सामान्य लक्षण:
  1. गले में खराश
  2. सिरदर्द
  3. खुजली और दर्द
  4. दस्त
  5. त्वचा पर चकत्ते आना या हाथ या पैर की उंगलियों का रंग बदल जाना
  6. लाल या सुजी हुई आंखें

रोकथाम

बुखार, खांसी है और सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर के पास जाएं. आपको स्वास्थ्य सेवा देने वाली संस्था से पहले ही संपर्क कर लें, ताकि वे आपको बता दें कि इलाज के लिए कहां जाना है. यह आपको बचाता है और वायरस और अन्य संक्रमणों को फैलने से रोकता है |

कोरोना महामारी का प्रभाव

वैश्विक महामारी का विनाशकारी प्रभाव केवल मानव जीवन और उसके स्वास्थ्य के साथ ही अर्थव्यवस्था तथा नागरिक असुविधाओं और कष्टों पर ही नजर आ रहा है। जबकि इस महामारी ने हमारा सदियों के अनुभवों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित सामाजिक तानाबाना और व्यवहार भी उतना ही नुकसान पहुंचा दिया है।
1 शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव – जहां पहले शिक्षा के लिए संस्था में जाना आवश्यक था वहीं अब इसे ऑनलाइन कर दिया गया है
2 रोजगार – रोजगार में इतिहासिक बदलाव इसी दौर में हुआ जब रोजगार घर बैठे भी संभव हो सका।
3. सामाजिकता का अभाव – बालक समेत सभी वर्ग के लोगो की सामाजिकता पर बेहद गहरा प्रभाव पढ़ा जहां सभी डिजिटल मीडिया की ओर जा रहे थे इससे और अधिक अभाव उत्पन्न हुआ।
4. डिजिटल मीडिया में विकास – जिस विकास में सालों का समय लगना था वहीं डिजिटल विकास तेजी से विकसित हुआ और बालको से लेकर वृद्ध व्यक्तियों ने भी डिजिटल मीडिया का साथ दिया।
5. टेक्नोलॉजी का उपयोग – एक समय था जब माना जाता था की कंप्यूटर के आने से नौकरियां चली जायेगी क्योंकि यह 4 आदमियों का काम कर लेता है पर ऐसा बिलकुल नही हुआ नई नौकरी उत्पन्न हुई।
6. रोगों के प्रति जागरूकता – समाज का एक बड़ा तबका रोगों से बचाव और रोगों के बारे में जागृत हुआ।
राज्य, केंद्र और विश्व पर कोरॉना का प्रभाव
7.चीन को निर्यात बाजारों के लुप्त होने और आपूर्ति श्रृंखलाओं से बाहर होने के खतरे का सामना करना पड़ रहा है
8. भारत नए विकल्प के रूप में उभर रहा है
9. भारत को विश्व की औषधि उत्पन्न करने वाले देश के रूप में जाना जाता है तो वहीं यहां उत्तराखंड भी पीछे नहीं है

उत्तराखण्ड Uttrakhand

उत्तराखण्ड हिमालई राज्य है जहां अनेक जड़ी – बूटियां पाई जाती हैं, जिससे युगों से अनेक रोगों का उपचार हुआ है।
उत्तराखण्ड के देहरादून से औषधि निर्माता कम्पनियों ने भारत को कोरोना महामारी में काम आने वाली औषधि का निर्माण बड़े पैमाने पर किया और भारत को विश्व में दवाई पहुंचाने के लिए सहायता की।

हिमालयी बुरांश से कोरोना की औषधि

बुरांश के बारे में शोध करना शुरू किया है जिसमे कुछ ऐसे रसायनों की खोज की जिन्हें फाइटोकेमिकल्स कहते हैं जो की कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी हैं यह शोध टीम के निष्कर्ष ‘बायोमोलेक्यूलर स्ट्रक्चर एंड डायनेमिक्स’ नामक जर्नल में हाल में प्रकाशित किए गए हैं।
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